गुरुवार, 15 अक्तूबर 2009

वो लाख झूठ कहें उनका एतबार करें

हम उनसे प्यार करें उनका इंतज़ार करें,
मगर वो जब भी मिलें हमको बेकरार करें.

समझ सके न उन्हें दोस्त हैं कि दुश्मन हैं,
चला के तीरे-नज़र दिल के आर-पार करें.

ये इश्क है कि नए दौर की सियासत है,
गले लगा के हमें वो जिगर पे वार करें.

अजीब शर्त यहाँ आशिकी निभाने की-
वो लाख झूठ कहें उनका एतबार करें.

हमें भी फूल चढायेंगे उनका वादा है,
अगर हम उनके लिए जिस्मो-जाँ निसार करें.

वीरेन्द्र वत्स

9 टिप्‍पणियां:

Nirmla Kapila ने कहा…

ये इश्क है कि नए दौर की सियासत है,
गले लगा के हमें वो जिगर पे वार करें.
बहुत खूब । दीपावली की शुभकामनायें

महफूज़ अली ने कहा…

bahut achchi lagi yeh kavita.........



aapko deepawali ki haardik shubhkaamnayen..........

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

इसी में उनकी तथा अपनी राजी खुशी है।
ह ह हा।
दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
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आइए हम पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।

AlbelaKhatri.com ने कहा…

खूबसूरत ग़ज़ल

अभिनन्दन !

आपको और आपके परिवारजन को
दीपोत्सव की हार्दिक बधाइयां
एवं मंगल कामनायें.......

Udan Tashtari ने कहा…

सुन्दर रचना..

सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

-समीर लाल ’समीर’

Harkirat Haqeer ने कहा…

अजीब शर्त यहाँ आशिकी निभाने की-
वो लाख झूठ कहें उनका एतबार करें.

हमें भी फूल चढायेंगे उनका वादा है,
अगर हम उनके लिए जिस्मो-जाँ निसार करें.


sunder bhav abhivyakti ....!!

pep1439 ने कहा…

हम उनसे प्यार करें उनका इंतज़ार करें,
मगर वो जब भी मिलें हमको बेकरार करें.




...bahut acchi pankti....

Alok singh ने कहा…

समझ सके न उन्हें दोस्त हैं कि दुश्मन हैं,
... khoob likha dil choo liya.

hitesh ने कहा…

अजीब शर्त यहाँ आशिकी निभाने की-
वो लाख झूठ कहें उनका एतबार करें.
...waah bhai waah.